घर वापसी और धर्मांतरण के झूठे आरोप लगा कर मसीहियों को सताने वाले लोग विशेष ध्यान दें...!
अजीजों !
आज मैं एक सवाल के साथ आपके सामने उपस्थित हूँ, उपयोगी एवं लाभकारी होना ज्यादा आवश्यक है या पुराना होना??
निसंदेह आपका उत्तर होगा उपयोगी एवं लाभकारी।
अब मसीहियत यानी Chritianity को इस सन्दर्भ (भारत)में समझने की कोशिश करते हैं।
आज समाज में एक ऐसा वर्ग उठ खड़ा हुआ है जो विद्वेषपूर्ण ये भ्रांति फेलाने पर आमादा है कि मसीहियत भारत के लिए ख़तरा है वगैरह वगैरह और इसी उन्माद के चलते सीधे साधे लोग इन धर्म के ठेकेदारों की बातों में आकर चर्चों पर, ईसाईयों की धार्मिक सभाओं में विध्न डालते हैं या औचक हमला कर देते है। घर वापसी जैसे कार्यक्रम भी इसी सोच की देंन है।
भारत में कुछ सर्वविदित आँकड़े, मैंआपके सामने रख रहा हूँ :-
1.मसीही लोगों को भिखारी के रूप में ढूंदना अति दुर्लभ है।
2.जुर्म की दुनिया में ईसाइयों की संख्या नगण्या है।
3.वो राज्य जहाँ ईसाई आबादी अधिक है वो अधिक साक्षर हैं जैसे केरला और नागालैंड।
4.भारत की कुल आबादी का 2.3% होने के बावजूद उच्च गुणवत्ता मेडिकल और शिक्षा में लगभग 50% योगदान।
5.कभी भी किसी भी प्रकार की संप्रदायिक हिंसा में शामिल ना होना।
6.ईसाई संस्थानो, अनाथ आश्रमों, चिकित्सल्यों में किसी भी प्रकार का भेदभाव नही किया जाता।
7.धार्मिक अल्पसंख्यक होने के बाद भी कभी आरक्षण की माँग नही की।
8.इनके विरोध प्रदर्शन भी शांति के एक मिसाल होते है।
9.कभी भी कोई भी अधिकारी या जज जो मसीही है भ्रष्टाचार या रिश्वतखोरी में लिप्त नही पाया गया।
10.प्रेम, क्षमा की आज भारत में कोई संप्रदाय मिसाल है तो वो सिर्फ और सिर्फ मसीहियत है।
अर्थात अत्यंत उपयोगी और लाभकारी समाज।
फिर क्यों होते है चर्चों पर हमले, नॅन्स के साथ बलात्कार, धार्मिक सभाओं में हिंसा, जीप में ज़िंदा जला देना, घर वापसी जैसे आयोजन...!!!
सोचिए और विचार कीजिए।
इतिहास गवाह है कि परमेश्वर के लोगों को कभी भी सीधे लड़ाई नही करनी पढ़ी क्योंकि उनकी लडा़ई खुद परमेश्वर ने लडी़ फिर चाहे वो मिस्र में राजा फिरोंन का समय हो, रोम में राजा कोन्स्टंताइन का समय हो या हिटलर द्वारा यहूदियों पर अत्याचार हो।
इतिहास गवाह है कि जब जब इन लोगों पर अत्याचार हुए ये लोग आश्चर्यजनक रूप से संख्या, बुद्धि, दिल, दिमाग, आत्मा और बल में बढ़ते गये।
प्रेम, शांति और क्षमा मसीहियत के प्रमुख स्तंभ है जो प्रभु यीशु हमें सिखाते है और ये सभी गुण हमें एक ज़िम्म्मेदार, ईमानदार और आदर्श भारतीय नागरिक बनाते है, जो कि असल में हमारे देश की उन्नति और प्रगती के लिए आवश्यक है ना की उनके जैसी अराजकता जो भारत को रसातल में ले जाने का कार्य कर रही है। गनीमत है कि ये कुछ चंद लोग ही है और सब एक जैसे नही।
याद रखिए कि प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास करने या बाइबिल पढ़ने से हमारी भारतीयता कम नही हो जाती, देश के लिए उपयोगी और लाभकारी होने की वजह से हम कही ज्यादा भारतीय है। कम से कम उनसे कही ज्यादा जो अराजकता की आग में देश को नर्क बनाने में तुले हुये है।
बस एक अपील है कि भारत देश की एकता और विविधता भरी संस्कृति को बनाए रखने के लिए हम एक साथ मिलजुल कर रहें, यही देश की सच्ची सेवा होगी।
✝जय मसीह की✝
🇮🇳जय भारत🇮🇳
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